राजस्थान निकाय चुनाव के कई रंग: छापे-नोटिस-गिरफ्तारी और आधी रात में कोर्ट, जानें चुनाव मैनेजमेंट की पूरी कहानी

राजस्थान निकाय चुनाव के कई रंग: छापे-नोटिस-गिरफ्तारी और आधी रात में कोर्ट, जानें चुनाव मैनेजमेंट की पूरी कहानी

Rajasthan: राजस्थान निकाय चुनाव में भाजपा ने 301 अध्यक्ष-मेयर पदों में 197 पर जीत दर्ज की, लेकिन कई जगह चुनावी गणित बदला। गिरफ्तारी की आशंका और मतदान अधिकार के विवाद में कांग्रेस व निर्दलीय हाईकोर्ट पहुंचे। केकड़ी और कुचेरा में कोर्ट की राहत के बाद कांग्रेस जीती।

राजस्थान के निकाय चुनाव में भाजपा ने पार्षदों के नतीजों के मुकाबले अध्यक्ष और मेयर की कुर्सियों पर कहीं ज्यादा बढ़त बनाई। 10,244 वार्डों में भाजपा ने 4,182 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस के खाते में 3,619 और निर्दलीयों के खाते में 2,273 सीटें गईं। इसके बाद अध्यक्ष, सभापति और मेयर के अब तक घोषित 301 नतीजों में भाजपा ने 197 पदों पर कब्जा जमाया, जबकि कांग्रेस को 94 पद मिले।

इन नतीजों ने यह साफ किया कि निकायों में बोर्ड बनाने के लिए केवल पार्षदों की संख्या ही निर्णायक नहीं रही। कई जगह बहुमत से दूर होने के बावजूद भाजपा का बोर्ड बना। वहीं कई ऐसे निकाय भी रहे, जहां कांग्रेस या निर्दलीय पार्षदों की संख्या अधिक होने के बावजूद भाजपा ने सत्ता हासिल की।

लेकिन इस चुनाव की कहानी का दूसरा पहलू भी है। कई जगह कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों तथा प्रत्याशियों ने गिरफ्तारी की आशंका, पुलिस कार्रवाई, मतदान के अधिकार और पार्षदों को कथित तौर पर रोकने जैसे मामलों को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कुछ मामलों में अदालत ने तत्काल राहत दी और चुनाव प्रक्रिया में पार्षदों के मतदान के अधिकार को लेकर हस्तक्षेप किया।
कुचेरा, केकड़ी, तिजारा, बीकानेर, हनुमानगढ़ और श्रीविजयनगर जैसे निकायों में चुनाव से ठीक पहले कानूनी लड़ाई सामने आई। कहीं गिरफ्तारी पर रोक लगी, कहीं पार्षदों के मतदान के अधिकार को लेकर अदालत पहुंचना पड़ा और कहीं नतीजों पर रोक लगा दी गई। इन घटनाक्रमों ने निकाय चुनाव को महज पार्षदों की संख्या का खेल नहीं रहने दिया।

इतिहास में पहली बार आधी रात तक हाईकोर्ट में सुनवाई
निकाय चुनाव की लड़ाई जब गिरफ्तारी की आशंका और मतदान के अधिकार तक पहुंची तो राजस्थान हाईकोर्ट में छुट्टी के दिन विशेष सुनवाई हुई। रविवार 20 सितंबर की रात कई मामलों में विशेष पीठों ने सुनवाई की। बीकानेर के कांग्रेस पार्षद मकसूद अहमद और हनुमानगढ़ के नौ पार्षदों समेत कई मामलों में गिरफ्तारी पर अंतरिम राहत दी गई। एक मामले में सुनवाई रात करीब 10 बजे शुरू होकर आधी रात के बाद करीब दो बजे तक चली। यह घटनाक्रम इसलिए भी अहम रहा क्योंकि सोमवार 21 सितंबर को कई निकायों में मेयर, सभापति और अध्यक्ष पद के चुनाव होने थे। ऐसे में अदालत के आदेश सीधे तौर पर उन पार्षदों के चुनाव में शामिल होने की संभावना से जुड़े थे।

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